हिस्सा_07 वज़ाइफे ग़ौसिया ___________ "या शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी शैयन लिल्लाह" ये वज़ीफा हमेशा से बुज़ुर्गाने दीन के मामूलात से रह...
हिस्सा_07
वज़ाइफे ग़ौसिया
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"या शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी शैयन लिल्लाह" ये वज़ीफा हमेशा से बुज़ुर्गाने दीन के मामूलात से रहा है क्योंकि हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को मुसीबत या परेशानी में याद करना हर मुश्किल का हल है,ज़ैल में 2 रिवायतें पेश करता हूं
19. एक शख्स का बयान है कि एक सफर में मेरी 14 ऊंटो पर शकर की बोरियां लदी थी मगर रास्ते में 4 ऊंट कहीं गुम हो गए मुझे सख्त परेशानी लाहिक हुई तो मुझे याद आया कि मेरे शेख ने फरमाया है कि जब भी मुसीबत में होना तो मुझे याद कर लेना ये सोचकर मैंने उनका नाम लेकर इस्तिगासा करना शुरू किया,अभी कुछ ही लम्हा गुज़रे थे कि मैंने एक टीले पर एक सफेद पोश बुज़ुर्ग को देखा वो मुझे बुला रहे थे मैं जब वहां पहुंचा तो वहां कोई ना था मगर मेरे चारों ऊंट वहीं टीले पर बैठे मिल गए
📕 क़लाएदुल जवाहर,सफह 230
20. हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की एक मुरीदनी कहीं किसी काम से ग़ार की तरफ गई उसके पीछे एक बदकार भी वहीं पहुंच गया और उसकी अज़मत रेज़ी का इरादा किया,उसने फौरन अपने पीर को याद किया उस वक़्त हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु अपने मदरसे में वुज़ू फरमा रहे थे आपने अपनी लकड़ी की खड़ाऊं को हवा में उछाल दिया जो सीधा ग़ार की तरफ चल पड़ी और वहां पहुंचकर उस बदकार के सर पर पड़ने लगी यहां तक कि वो मर गया
📕 शाने ग़ौसे आज़म,सफह 205
सलातुल ग़ौसिया
21. ये नमाज़ कज़ाए हाजत के लिए तीरे बहदफ है,वैसे तो जब भी सख्त हाजत हो इसे पढ़ सकते हैं लेकिन अगर रबीउल आखिर की 11 तारीख को पढ़ा जाये तो क्या कहना,उसका तरीक़ा ये है कि बाद नमाज़े मग़रिब 2 रकात नमाज़ नफ्ल क़ज़ाए हाजत इस तरह पढ़ें कि दोनों रकात में सूरह फातिहा के बाद सूरह इखलास 11,11 बार बाद सलाम के तीसरा कल्मा पढ़ें और 11 बार दुरूदे ग़ौसिया फिर 11 बार कहें या रसूल अल्लाह या नबी अल्लाह अग़िस्नी वमदुदनी फी क़'दाए हाजती या क़ा'दियल हाजात يا رسول الله يا نبى الله اغثنى وامددنى فى قضاء حاجتى يا قاضى الحاجات फिर 11 क़दम इराक़ की जानिब चलें और हर क़दम पर ये पढ़ें या ग़ौसस सक़ालैन वया करीमत तराफ़ैन अग़िस्नी वमदुदनी फी क़'दाए हाजती या क़ा'दियल हाजात يا غوث الثقلين ويا كريم الطرفين اغثنى وامددنى فى قضاء حاجتى يا قاضى الحاجات फिर अल्लाह की बारगाह में इन मुक़द्दस हस्तियों के तवस्सुल से दुआ करें,इन शा अल्लाह महरूम ना रहेंगे,
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 4,सफह 31
इस्तेखारये ग़ौसिया
सहाबये किराम रिज़वानुल्लाहि तआला अलैहिम अजमईन फरमाते हैं कि हमें रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इस्तेखारा की तालीम इस तरह दिया करते थे जिस तरह क़ुर्आन की तालीम देते थे,तो जब भी किसी मुबाह काम का इरादा करे मसलन सफर,घर या दुकान की तामीर,निकाह,तिजारत या उसका माल,किसी से पार्टनरशिप,सवारी या सवारी का जानवर,पालने का जानवर या नौकरी वग़ैरह तो इस्तेखारा कर लेना बेहतर है,बेहतर है कि इस्तेखारा शबे जुमा से शुरू किया जाए अगर पहली रात में कामयाबी मिल जाए तो अच्छा वरना 7 रातों तक लगातार करें फिर अपने दिल पर ग़ौर करें जिस पर ख्याल जम जाये वो बेहतर है,और अगर ख्वाब में सफेदी या सब्ज़ नज़र आये तो भी बेहतर है और अगर सुर्ख और सियाही नज़र आये तो फिर उस काम का क़स्द छोड़ दें,वैसे तो इस्तेखारे के लिए नमाज़ भी है और बहुत सारे वज़ीफे भी मगर चुंकि यहां हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मंसूब वज़ीफे का तज़किरा कर रहा हूं सो इस्तेखारये ग़ौसिया ही दर्ज करता हूं
22. इशा की नमाज़ के बाद रात को सोने से पहले अपनी हाजत को दिल में बसाकर अव्वल आखिर 11,11 बार दुरूदे ग़ौसिया और 1000 बार या शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी शैयन लिल्लाह يا شيخ عبد القادر الجيلانى شىء لله पढ़कर अपने दाहिने हाथ की हथेली पर दम करें और सर के नीचे रखकर सो जायें,जो भी जायज़ मक़सद होगा इन शा अल्लाह तआला हासिल होगा
📕 शम्ये शबिस्ताने रज़ा,हिस्सा 2,सफह 277
Allah Apko Ilm-e-deen Hasil Karne ki tofik de..... Dua me yaad

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