shabe barat ki duwa or namaj ka tarika,
Shabe Barat
शबे बरात
Shabe Barat शब ए बारात की हकीकत
हदीस – मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि “जब शाबान की 15वीं रात आये तो तुम लोग रात को इबादत करो और दिन को रोज़ा रखो, बेशक इस रात में खुदाये तआला आसमाने दुनिया पर तजल्ली फरमाता है और ऐलान करता है कि है कोई मगफिरत का तलबगार कि मैं उसे बख्श दूं, है कोई रोज़ी मांगने वाला कि मैं उसे रोज़ी दूं, है कोई बला व मुसीबत से छुटकारा मांगने वाला कि मैं उसे रिहाई दूं रात भर ये ऐलान होता रहता है यहां तक कि फज्र तुलु हो जाती है
📚📕 मिश्कात,सफह 115
📚📕 अत्तरगीब,जिल्द 2,सफह 52
शब ए बारात Shabe Baratकी रात कब्रस्तान जाने की हकीकत
हदीस – उम्मुल मोमेनीन सय्यदना आईशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं कि एक रात हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मेरे पास से अचानक उठकर चले गए, जब मैंने उन्हें ना पाया तो उनकी तलाश में निकली तो आपको जन्नतुल बक़ी के कब्रिस्तान में पाया कि आपका सर मुबारक आसमान की तरफ था, जब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने मुझे देखा तो फरमाया कि ऐ आईशा क्या तुझे ये गुमान था कि अल्लाह का रसूल तुम पर जुल्म करेगा इस पर मैंने अर्ज़ की कि या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मैंने सोचा कि शायद आप अपनी किसी और बीवी के पास तशरीफ ले गए हैं, तो आप फरमाते हैं कि shabe barat आज शाबान की 15वीं रात है आज रात मौला तआला इतने लोगों को बख्शता है जिनकी तादाद बनी क़ल्ब की बकरियों से भी ज़्यादा होती है
حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْخُزَاعِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ أَبُو بَكْرٍ، قَالَا: حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَنْبَأَنَاحَجَّاجٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ: فَقَدْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ لَيْلَةٍ، فَخَرَجْتُ أَطْلُبُهُ، فَإِذَا هُوَ بِالْبَقِيعِ رَافِعٌ رَأْسَهُ إِلَى السَّمَاءِ، فَقَالَ: يَا عَائِشَةُ، أَكُنْتِ تَخَافِينَ أَنْ يَحِيفَ اللَّهُ عَلَيْكِ وَرَسُولُهُ ، قَالَتْ: قَدْ قُلْتُ وَمَا بِي ذَلِكَ، وَلَكِنِّي ظَنَنْتُ أَنَّكَ أَتَيْتَ بَعْضَ نِسَائِكَ، فَقَالَ: إِنَّ اللَّهَ تَعَالَى يَنْزِلُ لَيْلَةَ النِّصْفِ مِنْ شَعْبَانَ إِلَى السَّمَاءِ الدُّنْيَا، فَيَغْفِرُ لِأَكْثَرَ مِنْ عَدَدِ شَعَرِ غَنَمِ كَلْبٍ .
ایک رات میں نے رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم کو ( گھر میں ) نہ پایا۔ میں آپ کی تلاش میں نکلی تو دیکھا کہ آپ بقیع میں ہیں اور آپ نے آسمان کی طرف سر اٹھایا ہوا ہے۔ ( جب مجھے دیکھا تو ) فرمایا: عائشہ! کیا تجھے یہ ڈر تھا کہ اللہ اور اس کا رسول تجھ پر ظلم کریں گے ؟ عائشہ رضی اللہ عنہا کہتی ہیں کہ: میں نے عرض کیا: مجھے یہ خوف تو نہیں تھا لیکن میں نے سوچا ( شاید ) آپ اپنی کسی ( اور ) زوجہ محترمہ کے ہاں تشریف لے گئے ہیں۔ تو آپ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: اللہ تعالیٰ نصف شعبان کو آسمان دنیا پر نزول فرماتا ہے اور بنوکلب کی بکریوں کے بالوں سے زیادہ ( لوگوں ) کو معاف فرما دیتا ہے ۔
📚📕 इब्ने माजा,जिल्द 1,हदीस 1389
📚📕 मिश्कात,सफह 114
सोचिये कि जब एक नबी कब्रिस्तान जा सकते हैं तो फिर उम्मती क्यों नहीं जा सकते, इस हदीस से कब्रिस्तान और मज़ारों पर जाना साबित हुआ
शब ए बारात के दिन रोजा रखने की हकीकत
हदीस – हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रमज़ान के अलावा सबसे ज़्यादा रोज़े शाबान में रखते थे यहां तक कि कभी कभी पूरा महीना रोज़े से गुज़ार देते, सहाबिये रसूल हज़रत ओसामा बिन ज़ैद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से इसकी वजह पूछी तो आप फरमाते हैं कि इस महीने में बन्दे के आमाल खुदा की तरफ उठाये जाते हैं तो मैं ये चाहता हूं कि जब मेरे आमाल खुदा की तरफ जायें तो मैं रोज़े से रहूं
📚📕 निसाई,जिल्द 3,सफह 269
शब ए बारात की रात कुछ को छोडकर तमाम मख्लुक बख्शिश होने ने की हकीकत
हदीस – हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि बेशक इस रात अल्लाह तआला तमाम मख्लूक़ की बख्शिश फरमाता है सिवाये शिर्क करने वाले और कीना रखने वालों के
📚📕 इब्ने माजा,जिल्द 1,हदीस 1390
फुक़्हा – बाज़ रिवायतों में मुशरिक,जादूगर,काहिन,ज़िनाकार और शराबी भी आया है कि इनकी बख्शिश नहीं होगी या ये कि तौबा कर लें
📚📕 बारह माह के फज़ायल,सफह 406
फुक़्हा – जो इस रात में 2 रकात नमाज़ पढ़ेगा तो उसे 400 साल से भी ज़्यादा का सवाब अता किया जायेगा
📚📕 नुज़हतुल मजालिस,जिल्द 1,सफह 132
फुक़्हा – हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि एक नफ्ल रोज़े का सवाब इतना है कि अगर पूरी रूए ज़मीन भर सोना दिया जाए तब भी पूरा ना होगा
📚📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 95
फुक़्हा – अगर इस रात पानी में बैर की 7 पत्ती को जोश देकर उसे ग़ुस्ल करे तो इन शा अल्लाह तआला पूरा साल जादू और सहर से महफूज़ रहेगा
📚📕 इस्लामी ज़िन्दगी,सफह 77
namaj ka tarika नमाज का तरीका
नमाज़ें इस रात में बहुत हैं और सबकी अपनी अपनी फज़ीलत है मगर याद रखें कि नफ्ल इबादतें जितनी भी हैं चाहे वो नमाज़ हो या रोज़ा उसी वक़्त क़ुबूल होगी जब कि फर्ज़ ज़िम्मे पर बाकी ना हो, लिहाज़ा जिसकी नमाज़ क़ज़ा हो वो क़ज़ा-ए उमरी पढ़े और जिनका रमज़ान का रोज़ा क़ज़ा हो वो इस रोज़े के बदले रमज़ान के रोज़े की क़ज़ा की नियत करे, जिनकी बहुत ज़्यादा नमाज़ें क़ज़ा हो उसको आसानी से अदा करने के लिए सरकारे आलाहज़रत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि:-
फुक़्हा – एक दिन की 20 रकात नमाज़ पढ़नी होगी पांचों वक़्त की फर्ज़ और इशा की वित्र,नियत यूं करें “सब में पहली वो फज्र जो मुझसे क़ज़ा हुई अल्लाहु अकबर” कहकर नियत बांध लें युंही फज्र की जगह ज़ुहर अस्र मग़रिब इशा वित्र सिर्फ नमाज़ो का नाम बदलता रहे,क़याम में सना छोड़ दे और बिस्मिल्लाह से शुरू करे,बाद सूरह फातिहा के कोई सूरह मिलाकर रुकू करे और रुकू की तस्बीह सिर्फ 1 बार पढ़े फिर युंही सजदों में भी 1 बार ही तस्बीह पढ़े इस तरह दो रकात पर क़ायदा करने के बाद ज़ुहर अस्र मग़रिब और इशा की तीसरी और चौथी रकात के क़याम में सिर्फ 3 बार सुब्हान अल्लाह कहे और रुकू करे आखरी क़ायदे में अत्तहयात के बाद दुरूद इब्राहीम और दुआए मासूरह की जगह सिर्फ “अल्लाहुम्मा सल्लि अला सय्यदना मुहम्मदिंव व आलिही” कहकर सलाम फेर दें,वित्र की तीनो रकात में सूरह मिलेगी मगर दुआये क़ुनूत की जगह सिर्फ “अल्लाहुम्मग़ फिरली” कह लेना काफी है
📚📕 अलमलफूज़,हिस्सा 1,सफह 62
हदीस – उम्मुल मोमेनीन सय्यदना आईशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को खाने में हलवा और शहद बहुत पसन्द थे
📚📕 बुखारी,जिल्द 2,हदीस 5682
फुक़्हा – शबे बरात में हलवा पकाकर ईसाले सवाब करना जायज़ और बेहतर है
📚📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 123
shabe barat ki duwa
मगर अवाम में जो ये मशहूर है कि इस दिन हज़रत उवैस करनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की फातिहा करते हैं और इसकी दलील ये देते हैं कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का जंगे उहद में दन्दाने मुबारक शहीद होने की खबर सुनकर हज़रत उवैस करनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने अपने सारे दांत तोड़ डाले थे ये रिवायत सही नहीं है बल्कि शबे बरात और हज़रत उवैस करनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु में कोई कनेक्शन नहीं है, हां रही बात ईसाले सवाब की तो बिलकुल हज़रत उवैस करनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का नाम भी नज़्र में शामिल किया जाए इसमें कोई हर्ज नहीं मगर लोगों की इस्लाह की जाए कि बे अस्ल बातों से परहेज़ करें, युंही फातिहा व नज़रों नियाज़ हर उस चीज़ पर कर सकते हैं जिसका खाना जायज़ है उसके लिए किसी खास खाने की क़ैद लगाना भी दुरुस्त नहीं है लिहाज़ा जिसके जो दिल में आये पकाकर ईसाले सवाब करे, फातिहा मर्द व औरत में कोई भी दे सकता है बेहतर है कि जो सही क़ुर्आन पढ़ सकता हो वही फातिहा दे, तरीक़ा ये है
फातिहये रज़विया
- दुरुदे ग़ौसिया 7 बार
- सूरह फातिहा 1 बार
- आयतल कुर्सी 1 बार
- सूरह इख्लास 7 बार
- फिर दुरुदे ग़ौसिया 3 बार
अब हाथ उठाकर बिस्मिल्लाह शरीफ और दुरुदे पाक शरीफ पढ़ें उसके बाद इस तरह बख्शें और युं कहें कि “या रब्बे करीम जो कुछ भी मैंने ज़िक्रो अज़कार दुरुदो तिलावत की (या जो कुछ भी नज़रों नियाज़ पेश है) इनमे जो भी कमियां रह गई हों उन्हें अपने हबीब सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के सदक़े में माफ फरमा कर क़ुबूल फरमा,मौला इन तमाम पर अपने करम के हिसाब से अज्रो सवाब अता फरमा,इस सवाब को सबसे पहले मेरे आक़ा व मौला जनाब अहमदे मुजतबा मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में पहुंचा,उनके सदक़े व तुफैल से तमाम अम्बियाये किराम,सहाबाये किराम,अहले बैते किराम,औलियाये किराम,शोहदाये किराम,सालेहीने किराम खुसूसन हुज़ूर सय्यदना ग़ौसे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की बारगाह में पहुंचा,इन तमाम के सदक़े तुफैल से इसका सवाब तमाम सलासिल के पीराने ओज़ाम खुसूसन हिंदल वली हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की बारगाह में पहुंचा,बिलखुसूस सिलसिला आलिया क़ादिरिया बरकातिया रज़विया नूरिया के जितने भी मशायखे किराम हैं खुसूसन आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा खान रज़ियल्लाहु तआला अन्ह की बारगाह में पहुंचा,मौला तमाम के सदक़े व तुफैल से इन तमाम का सवाब खुसूसन …… (जिसके नाम से करनी है उसका नाम लें) ….. को पहुंचाकर हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आज तक व क़यामत तक जितने भी मोमेनीन मोमिनात गुज़र चुके या गुज़रते जायेंगे उन तमाम की रूहे पाक को पहुंचा” फिर अपनी जायज़ दुआयें करके दुरुदे पाक और कल्मा शरीफ पढ़कर चेहरे पर हाथ फेरें
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आसमानी किताबें (Aasmani Kitabe)
abdul qadir jilani सय्यिद अब्दुल क़ादिर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हिस्सा-01
- रमज़ान मुबारक
- नमाज़ के फर्ज़ों का बयान
- तकबीरे इन्तिक़ाल
- किसकी नमाज शुरू ही न हुई ?
- किसकी नमाज न हुई?
- गुंगा या जबान बंद हो, ऐसे व्यक्ति की तकबीरे तहरिमा कैसे होगी?
- तकबीरे तहरिमा की फजीलत कब मिलेगी?
- तकबीरे तहरिमा के लिए क्या कहना वाजिब है?
- तकबीरे तहरिमा में क्या करना सुन्नत है ?
- अगर इमाम तकबीरे इन्तिक़ाल यानि अल्लाहु अकबर बुलंद आवाज़ से कहना भूल गया
- जिसका आदमी का एक ही हाथ हो, वह तकबीरे तहरिमा कैैैसे करे ?
- मुकतदी और अकेले नमाज पढनेे वाला अल्लाह अकबर की आवाज ?
- दिन व रात में कुल कितनी नमाज है?
- फजर का वक़्त
- ज़ुहर का वक़्त
- असर का वक़्त
- मग़रिब का वक़्त
- इशा का वक़्त
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